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भा.कृ.अनु.प. – राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केन्द्र
ICAR – National Research Centre for Makhana
Darbhanga – 846005 (Bihar), India
भा.कृ.अनु.प. – राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केन्द्र
ICAR – National Research Centre for Makhana

Darbhanga – 846005 (Bihar), India
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
Indian Council of Agricultural Research

Krishi Bhawan, New Delhi-110 001

प्रोफ़ाइल

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परिचय

आईसीएआर - मखाना के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र के लिए मखाना (एनआरसी-एम) की स्थापना हुई थी दरभंगा पर 28 फरवरी 2002th फरवरी 2002 में, बिहार के मिथिला क्षेत्र में मखाने के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसकी स्थापना की गई थी। आज भी, इसे दुनिया का एकमात्र ऐसा रिसर्च सेंटर माना जाता है जो खास तौर पर मखाने पर रिसर्च के लिए समर्पित है। हालांकि, 2023 में इसके काम का दायरा बढ़ा दिया गया ताकि इसमें कमल, सिंघाड़ा, मछली और दूसरी ऐसी जलीय फसलों पर भी रिसर्च की जा सके जिनका पोषण, दवा, उद्योग और अर्थव्यवस्था के नज़रिए से बहुत महत्व हो सकता है। अपने दो दशकों से ज़्यादा के सफ़र में, NRC-M, दरभंगा ने अपनी रिसर्च और विस्तार गतिविधियों के ज़रिए मखाने के उत्पादन और उत्पादकता को बेहतर बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ी है और खेती का दायरा भी बढ़ा है, जिससे मखाना ग्लोबल स्तर पर एक 'सुपरफूड' के तौर पर स्थापित हुआ है। वैज्ञानिकों की एक मज़बूत मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम, नए और अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और रिसर्च सुविधाओं/इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ, NRC-M, दरभंगा का लक्ष्य मखाने की खेती को पूरे देश में फैलाने के लिए अपनी रिसर्च और विस्तार गतिविधियों को और तेज़ी से आगे बढ़ाना है। इसका मकसद मखाने की प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के लिए ऐसी तकनीकें विकसित करना भी है जो कम खर्चीली हों और आसानी से अपनाई जा सकें, ताकि मखाने के उत्पादन और प्रोसेसिंग में दुनिया में भारत की अग्रणी स्थिति का बेहतर फ़ायदा उठाया जा सके। NRC-M, दरभंगा अपनी मांग-आधारित रिसर्च और आउटरीच गतिविधियों के ज़रिए किसानों की आमदनी और आजीविका को बेहतर बनाने, और बिहार, पूर्वी भारत व अन्य क्षेत्रों की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसकी मुख्य उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
  • मखाना की प्रथम उन्नत किस्म "स्वर्ण वैदेही" का विकास एनआरसी-एम, दरभंगा द्वारा वर्ष 2013 में किया गया। इसकी उत्पादन क्षमता 2.8–3.0 टन प्रति हेक्टेयर है, जो उस समय तक प्रचलित पारंपरिक खेती से प्राप्त उत्पादन की तुलना में लगभग दोगुनी थी।
  • नआरसी-एम, दरभंगा ने मखाना की खेती के लिए कम जल (30–45 सेमी जल गहराई) की आवश्यकता वाली खेत आधारित प्रणाली विकसित की, जिससे पारंपरिक तालाब आधारित खेती की तुलना में उत्पादकता लगभग दोगुनी हो गई। इस प्रणाली में मखाना की खेती को अपनाने से इसका विस्तार नए क्षेत्रों और अधिक किसानों तक तेजी से हुआ है।
  • एनआरसी-एम, दरभंगा द्वारा फसल प्रणाली (क्रॉपिंग सिस्टम) आधारित मखाना खेती की तकनीक विकसित की गई, जिससे एक ही भूमि पर वर्ष में अधिकतम तीन फसलों की खेती संभव हुई। इससे फसल सघनता, भूमि की उत्पादकता तथा किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। 
  • मखाना-सह-मत्स्य पालन प्रणाली की भी शुरुआत की गई। केंद्र द्वारा मत्स्य-सह-मखाना खेती हेतु रिक्त स्थान आधारित प्रणाली तथा परिपोषी जीव-आधारित मत्स्य-सह-मखाना खेती प्रणाली का विकास किया गया।
  • एनआरसी-एम, दरभंगा द्वारा मखाना की खेती के लिए पोषक तत्त्व प्रबंधन तथा फसल संरक्षण उपायों सहित एक समग्र कृषि कार्य-पद्धति विकसित की गई।
  • एनआरसी-एम, दरभंगा ने मखाना की खेती, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तथा विपणन के क्षेत्र में हजारों किसानों एवं उद्यमियों को प्रशिक्षण प्रदान किया है। इसके परिणामस्वरूप उत्तर बिहार तथा अन्य क्षेत्रों में मखाना की उत्पादकता, किसानों की आय तथा मखाना-आधारित उद्योगों के विकास में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है।   
  • पिछले पाँच वर्षों में बिहार में मखाना की खेती का क्षेत्रफल 13,000–15,000 हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 40,000 हेक्टेयर हो गया है। वर्तमान में बिहार के अतिरिक्त छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा तथा मणिपुर सहित अनेक राज्यों में भी मखाना की खेती की जा रही है। 
  • केंद्र द्वारा सिंघाड़े की दो उन्नत किस्मों, अर्थात् ‘ स्वर्ण हरित ’ तथा ‘स्वर्ण लोहित’का भी विकास किया गया है।
  • कमल के पोषणीय, औषधीय, औद्योगिक तथा आर्थिक महत्व का अन्वेषण करने के उद्देश्य से इस पर अनुसंधान कार्य भी प्रारंभ किया गया है।

आईसीएआर-राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा का संस्थान भवन

जनादेश

मखाना तथा मत्स्य पालन सहित अन्य जलीय फसलों के उत्पादन, उत्पादनोत्तर प्रबंधन एवं मूल्य संवर्धन पर आधारभूत तथा रणनीतिक अनुसंधान।

मिशन

मखाना एवं अन्य जलीय फसलों के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान एवं सतत प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना तथा नवाचार, ज्ञान हस्तांतरण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाना।

विजन

मखाना एवं अन्य जलीय फसलों के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान तथा सतत प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करते हुए नवाचार, ज्ञान हस्तांतरण एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाना।