उपयुक्त यंत्रीकरण, उन्नत उत्पादन पद्धतियों, जैविक सुधार, मानकीकरण तथा प्रबंधन प्रणालियों के अनुप्रयोग के माध्यम से मखाना एवं अन्य जलीय फसलों से जुड़े सभी हितधारकों की आजीविका में सुधार करना, साथ ही स्वास्थ्य, पोषण सुरक्षा एवं पर्यावरणीय सततता सुनिश्चित करना।